Banaras Hindu University·4 days ago
A short poem written on the Assi Ghat steps at twilight
किताबों की दुनिया से जब थक जाता हूँ,
गंगा किनारे थोड़ी देर बैठ आता हूँ।
लहरों की रवानगी में कुछ ऐसा ठहराव है,
जो शहर के शोर में कभी ढूँढ नहीं पाता हूँ।
चार साल की ये ज़िंदगी भी इक कश्ती ही तो है,
किनारा मिल भी जाए तो सफ़र याद बहुत आएगा।
